थानाधिकारी को बेटे की शादी के लिए नहीं मिली छुट्टी, फूट-फूट कर रोए, हार्ट अटैक से तनाव में मौत

उच्चैन. पुलिस महकमे में कितने मानसिक दबाव में पुलिस वाले का करते हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भरतपुर जिले के उच्चैन थाने में पदस्थापित थानाधिकारी होशियार सिंह को अपने बेटे के विवाह के लिए अवकाश नहीं मिला तो सदमे में आ गए, दुखी होकर फूट फूट कर रोए और उनकी अचानक हार्ट अटैक आने से मौत हो गई.

एक अच्छे व्यक्तित्व और पर्सनलिटी के धनी होशियार सिंह ने हर पल प्रदेश की सेवा में अपनी जी जान लगा दी थी, और उन्हे उम्मीद थी की जिस बेटे को उन्होंने हर पल पाला पोसा, उसे संस्कार दिए, उसे पढाया लिखाया और अच्छे घर में उसका रिश्ता कर एक अच्छे पिता के तौर पर हर जिम्मेदारी बेहतरी से वहन की. उसके बाद शायद शादी की रस्में भी पूरे समर्पण के साथ पूरी करेंगे, लेकिन शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था. वो अपने बेटे की शादी छोडिए सगाई और टीके की रस्म के लिए भी समय नहीं दे पा रहे थे. पुलिस की नौकरी भी ऐसी की चाह कर भी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड सकते थे. ऐसे में उनको इस बात का इतना गम बैठा की वो सदमे में चले गए और अचानक उनकी मौत हो गई. होशियार सिंह की इस मौत के साथ ही पुलिस महकमे में पुलिस पर कितना दबाव है इस विषय पर एक बार फिर बहस शुरु हो गई है.
बेटे की शादी से 12 दिन पहले गुरुवार सुबह होशियार ने अस्पताल में दम तोड़ दिया. होशियार सिंह के बेटे की 16 नवंबर को सगाई और टीके की रस्में होनी थीं, लेकिन बताया जा रहा है कि अफसरों द्वारा छुट्टियां मंजूर नहीं करने पर वो तनाव में चल रहे थे. शादी की तारीख 25 नवंबर बताई गई है. होशियार टोंक जिले के रहने वाले थे, ऐसे में उच्चैन से बिना इजाजत के घर जाना भी संभव नहीं था. पारिवारिक कार्यक्रम के लिए छुट्टी नहीं मिलने के कारण बीते कई दिनों से डिप्रेशन में चल रहे थे और आखिरकार उनका निधन हो गया.
बताया जा रहा है कि हालांकि अधिकारियों ने 15 नवंबर से उनको अवकाश पर जाने की मौखिक इजाजत दे दी थी लेकिन इन सबके बीच उनके सब्र को बांध टूट गया और रात को वो फूट-फूट कर रोए जिसके बाद अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया और उनकी मोत हो गई.
वैसे आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले ही ऐसे ही तनाव के चलते 2015 बैच में भर्ती हुए एक सिपाही ने शादी की तैयारियों के लिए अवकाश ना मिलने पर आत्महत्या कर ली थी. वह भी अवकाश नहीं मिलने पर तनाव में चल रहा था. वो भी ज्यादा तनाव झेल नहीं सका और सीढ़ियों की रेलिंग पर फंदा लगाकर उसने जान दे दी. इस घटना के बाद शाम को ही पुलिस अफसरों ने छुट्टियों पर लगे बैन को भी हटा दिया था. अब सवाल उठता है कि आखिर दिन रात सेवा में समर्पित रहने वाले पुलिसकर्मियों के अवकाश का कोई बेहतर सिस्टम बनेगा या नहीं.


