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अब जेल भेजने से पहले अभियुक्त की होगी कोरोना जांच, जयपुर जेल में कोरोना विस्फोट के बाद गृह विभाग के आदेश

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Alert100 मई 20, 2020

जयपुर. राजस्थान में अभियुक्त को अब जेल में भेजने से पहले कोरोना जांच करानी होगी. रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो जेल नहीं भेजा जाएगा, बल्कि कड़ी सुरक्षा में प्रोटोकॉल के मुताबिक पहले अस्पताल में इलाज कराया जाएगा. रिपोर्ट निगेटिव आएगी तभी अपराधी को भेजा जाएगा, जिसके बाद भी 21 दिन तक जेल में पृथक से बने आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा. गृह विभाग ने इस सबंध में आदेश जारी किए हैं.

इतना ही नहीं पुलिस किसी को गिरफ्तार करती है तो उसे मास्क व केप पहनाए जाएंगे. तलाशी के दौरान पुलिस को दस्ताने पहनने होंगे. पुलिस स्टेशन के लॉकअप को किया सैनेटाइज किए जाने के साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग की भी पालना लॉकअप में करवाई जाएगी. लॉकअप में दिए गए कंबल की धुलाई नियमानुसार, नियमित होगी. पुलिस स्टेशन के लॉकअप में व्यक्ति या अभियुक्त को मुक्त करने के बाद भी फिर से सैनेटाइज किया जाना अनिवार्य होगा. नये आने वाले व्यक्ति या अभियुक्त को अलग से साफ-सुथरा कंबल उपलब्ध करवाया जाए.

गिरफ्तार अभियुक्त को यथाशीघ्र विडियो कांफ्रेंसिंग या व्यक्तिगत मजिस्ट्रेट या न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा के आदेश प्राप्त किए जावेगें. पर इस दौरान भी यह खास ध्यान रखा जाएगा कि संबंधित अभियुक्त कोरोना पॉजिटिव तो नहीं है, ऐस में पहले उसकी जांच कराई जाएगी. जांच पॉजिटिव आई तो जेल में डालने से पहले उसे अस्पताल में सुरक्षा के बीच भर्ती कराकर इलाज करवाया जाएगा.

मेडिकल जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी की नियुक्त मेडिकल टीम द्वारा करवाई जाएगी. जिला अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती रहने के दौरान जांच रिपोर्ट आने तक पुलिस गार्ड ज़िला पुलिस उपलब्ध करवाएगी. पॉजीटिव रिपोर्ट आने पर मेडिकल विभाग के प्रोटोकॉल के हिसाब कार्यवाही करेगा. जांच रिपोर्ट नेगेटिव आने पर अभियुक्त को ज़िला या केन्द्रीय कारागृह में भेजकर जेल में बनाये गये आईसोलेशन वार्ड में 21 दिन तक अलग रखा जाना अनिवार्य होगा.

जेल के आईसोलेशन वार्ड में 21 दिन रखने के उपरांत भी जांच करवाई जाएगी. दुबारा जांच करने पर नेगेटिव रिपोर्ट आए तो सामान्य वार्ड में रखा जाए. वहीं जमानत मिलने पर ऐसे अभियुक्त को 14 दिन होम क्वारिनटीन किया जायेगा. न्यायालय द्वारा जमानत अस्वीकार करने पर ऐसे अभियुक्त को कारागार के सामान्य वार्ड में दाखिल किया जावें. गृह विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देशों के मुताबिक न्यायालय द्वारा उक्त व्यक्ति/अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया जाता है तो पुलिस को अभियुक्त को आवश्यकता अन्वेषण के लिए न्यायालय की आज्ञा से पुलिस अभिरक्षा में भेजा जा सकता है. केवल विशेष परिस्थियां हो तभी कोविड अवधि में पुलिस रिमांड पर लिया जाए. वापस कारागार भेजने पर पुन: वही प्रकिया अपनाई जाएगी जो प्रथम प्रवेश के लिए निर्धारित की गई है. कर्मचारी व क़ैदियों का नियमित चेकअप सुनिश्चित करना होगा.

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